Tuesday, January 10, 2017

*मेरी नजर से शाश्वत तीर्थ यात्रा संघोत्सव का संक्षिप्त विवरण*

*मेरी नजर से शाश्वत तीर्थ यात्रा संघोत्सव का संक्षिप्त विवरण*
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कहावत है *'तारे सो तीर्थ'* यानि जो भवसागर से तारे, वह तीर्थ| इन पवित्र स्थलों के दर्शन का सुंदर स्वप्न हर व्यक्ति के हृदय में रहता है ताकि इस भव की आधि-व्याधि-उपाधि के संकट से निजात पाने के साथ परभव के कर्मो की भी निर्जरा कर मोक्ष-मुक्ति की भावना को साकार करते हैं लेकिन प्रबल पुण्य प्रभाव से कुछ पुण्यशाली आत्मा स्वयं के साथ सकल श्रीसंघ को भी तीर्थ यात्रा का सामूहिक लाभ देने का अवसर प्राप्त करते हैं| इसी उद्देश्य से मुंडारा हाल जोगेश्वरी निवासी श्रीमान शा. मिश्रीमलजी मंडलेशा परिवार ने मुंबई से श्री सिद्धाचल तीर्थ यात्रा का सुंदर आयोजन 05 से 09 जनवरी 2017 को किया, जिसमें 450 पारिवारिक सदस्यों ने शाश्वत तीर्थ के दर्शन किये|
                   *शाश्वत तीर्थ संघोत्सव यात्रा* में सम्मिलित होने वाले सभी यात्रालु रात्रि 8 बजे नियत समय पर बांद्रा टर्मिनस से ट्रेन द्वारा रवाना हुए, कुछ सदस्य अँधेरी व बोरीवली से भी जुड़े| इसके बाद उमंग व हर्षित माहौल में संगीतमय रात्रि भक्ति व स्नेहीजनों का माल्यार्पण व अनुमोदना के साथ सभी आपसी जान-पहचान को पुख्ता कर रहे थे| खैर! समय ज्यादा होने पर ना चाहते हुए भी कुछ लोग निद्रा देवी की गोद में सिर रखकर स्वप्नलोक की सैर कर आये, वहीं परिवार के युवा वर्ग के बेटे और जमाइयों (जमाई से अधिक बेटे) पूरी रात अन्य व्यवस्थाओं की तैयारी में गुजारी| सुबह ट्रेन सोनगढ़ स्टेशन पर पहुंची, जहाँ से गन्तव्य तक जाने हेतु बसे तैयार खड़ी थी| बस में आयोजक परिवार द्वारा ड्राईफ्रूट, चिक्की, मुखवास,चॉकलेट, पानी आदि दिए गए| सभी यात्रियों के ठहरने की उत्तम व्यवस्था सुणतर धर्मशाला व परमार धर्मशाला में की गई थी|
                                द्वितीय दिवस नित्यकर्म से निवृत होकर नाश्ते के पश्चात श्री सिद्धचक्र पूजन के आयोजन किया गया| तत्पश्चात दोपहर के भोजन के बाद कुछ लोगों ने यात्रा की थकान और दुसरे दिन पहाड़ चढने हेतु अग्रिम विश्राम किया, वहीं कुछ लोग शॉपिंग और अन्य जिनालयों के दर्शन के लिए चले गये| संध्या को चौविहार भोजन व प्रतिक्रमण पश्चात सुंदर गिरिराज भावयात्रा कार्यक्रम में तिर्थाधिराज की महत्ता का अदितीय वर्णन सुनने का अवसर प्राप्त हुआ| तृतीय दिवस सभी यात्री प्रात: जल्दी उठकर दादा के दर्शन करने हेतु रवाना हो गया| सुणतर भवन के बाहर डोली वालों का हुजूम उमड़ा हुआ था, हर कोई अपना कार्ड यात्रियों को देने हेतु बेताब था| हालाँकि ज्यादातर श्रद्धालु 3750 सीढियाँ चढ़कर ही गए, जबकि *‘तीर्थंकर दर्शन विरला पावे’* की उच्च भावना से ओत-प्रोत कुछ उम्रदराज लोगों के लिए डोली भी की गई| दादा के दर्शन एवं सानिध्य के लिए यात्री अलसुबह 4-5 बजे तलेटी के दर्शन करने के पश्चात पैदल चढ़ाई के दौरान अन्य टूंको व घेटीपार के भी दर्शन-पूजन कर दीनानाथ के दरबार में अपनी हाजिरी दर्ज करवाई और पक्षाल व पूजन कर स्वयं को धन्य किया| फिर पुन: नीचे आकर भोजन व विश्राम पश्चात संध्याकालीन कार्यक्रम में भक्ति व मातृ-पितृ वंदना का अविस्मरनीय कार्यक्रम किया गया, जिसमें सभी की आँखे नम हो गई| तत्पश्चात परमात्मा की भव्य आरती पश्चात रात्रि विश्राम किया| चतुर्थ दिवस सकल चतुर्विध श्रीसंघ सुबह 5:30 बजे घोड़े-बग्गियों व ढोल-नगाड़ों के साथ बाजते-गाजते तलेटी पहुंचकर प्रभु को थाल अर्पण कर सामूहिक चैत्यवंदन किया और वहां से वापस आकर जीवित महोत्सव कार्यक्रम को साक्षात किया, जिसमें बहुत ही सुंदर पारिवारिक माहौल नजर आ रहा था| आख़िरकार वह समय भी आ गया, जब संघ समापन की घोषणा की गई और सभी यात्रीगण भोजन आदि कर सोनगढ़ से मुंबई के लिए रवाना हुए| सभी यात्री आनन्द-उमंग एंव हर्ष के लम्हों से ओत-प्रोत नजर आए, वहीं धर्म-अध्यात्म, सामायिक-प्रतिक्रमण, प्रार्थना-आराधना, भजन, गीत-संगीत,अंताक्षरी चर्चा-परिचर्चा, हास्य-परिहास आदि के नजारे भी दृष्टिगोचर हो रहे थे| संघ में कार्यक्रम संचालन का संपूर्ण दायित्व युवावर्ग के अमितजी,अंकितजी, विनीतजी सहित सभी जमाईसा, बेटियां व बहुओं ने अपने कंधो पर बखूबी उठाया| साथ ही संगीतकार निकेश बरलोटा, फोटोग्राफर केतन भाई,जे. पुरोहित केटरिंग वालों को धन्यवाद में स्वयं का सहभागी बनाया|  यात्रा की सुनहरी व मधुर यादों को मन में संजोये हुए सभी ने एक-दुसरे से जय-जिनेन्द्र कहकर विदाई ली और जल्द ही फिर से मिलने का वादा कर अपनी कर्मस्थली मुंबई की ओर रवाना हुए|
                      *ज्योती श्रीपाल मुणोत* 
                           प्रमुख संपादक  
                        गोडवाड़ ज्योति




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