Monday, December 26, 2016

जवाई अधिक भरा तो मेहमान रूठ गए.... जानिए क्या कारण रहे

सुमेरपुर (पाली). पश्चिमी राजस्थान सबसे बड़े जवाई बांध पर इन दिनों विदेशी मेहमानों के रूप में प्रवासी पक्षियों ने डेरा डालना शुरू कर दिया है। ऐसा नहीं है कि विदेशी परिंदे यहां पहली बार आए हैं, हर साल सर्दियों में आना और गर्मी में गंतव्य लौटना इनकी स्वभाविक प्रक्रिया रही है। लेकिन इस वर्ष जवाई बांध भरा होने से विदेशी मेहमान कम संख्या में पहुंचे हैं।
सर्दी शुरू होने के साथ जवाई बांध के डूब क्षेत्र में प्रवासी पक्षी नजर आने लगे हैं। देश-विदेश के विभिन्न इलाकों से सर्दी शुरू होने के साथ जवाई बांध क्षेत्र में आकर डेरा डालना और गर्मी आने पर वापस गंतव्य की ओर प्रस्थान कर जाना इनकी वार्षिक गतिविधियों में शुमार हो गया है। जानकार बताते हैं कि विदेशी परिेंदे अपना ठिकाना आसानी से नहीं बदलते हैं। वर्षों तक उसी ठिकाने पर डेरा डालते हैं, जहां ये अपने को सुरक्षित महसूस करते हैं। जवाई के भराव क्षेत्र में कई पहाडऩुमा टापू पक्षियों को सुरक्षा प्रदान करते हैं। लेकिन इस वर्ष जवाई बांध क्षेत्र में अब तक विदेशी परिंदों की आवक कम हुई है। इसकी वजह बांध में अधिक पानी होना बताया जा रहा है। मीठे पानी के परिंदे हमेशा छिछले पानी में रहना पसंद करते हैं। जहां उन्हें शिकार आसानी से उपलब्ध हो जाता है। आसपास के खेतों में भी दाने की व्यवस्था रहती है। गहरे पानी में शिकार करना हर परिंदे के लिए मुमकीन नहीं है। ऐसे में विदेशी परिंदों ने फिलहाल आसपास इलाकों के तालाबों में डेरा डाल रखा है। जवाई में पानी कम होने के बाद विदेशी मेहमानों के जवाई क्षेत्र में आने की संभावना जताई जा रही है। इन दिनों जवाई बांध के पिछले हिस्से में बॉर हैडेड गूस की संख्या अधिक नजर आ रही है। यह लम्बी उड़ान भरने वाला पक्षी है। उक्त पक्षी दक्षिण व मध्य एशिया से हिमालय को पार कर सर्दी की सीजन शुरू होते ही यहां आते हैं और मार्च माह तक वापस गंतव्य स्थान पर लौट जाते हैं।

आसानी ने नहीं बदलते ठिकाना
जानकार बताते हैं कि विदेशी परिेंदे अपना ठिकाना आसानी से नहीं बदलते हैं। वर्षों तक उसी ठिकाने पर डेरा डालते हैं, जहां ये अपने को सुरक्षित महसूस करते हैं। विदेशी मेहमान अपने अनुकूल वातावरण में ही कुनबा बढ़ाते हैं। खासकर सर्दी का मौसम कुनबा बढ़ाने के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। कारण कि इन्हें खाने-पीने की सारी चीजें एक जगह पर ही मिल जाती हैं। सीजन में जवाई के भराव क्षेत्र के आसपास रिंग्ड प्लॉवर, बॉर हैडेड गूस, पोर्चाड, व्हाइट आईबिस, पेन्टेड स्टॉक, मालार्ड, स्टिन्ट सहित कई विदेशी परिंदे प्रतिवर्ष आते हैं।

इनका कहना है...जवाईबांध में सालभर पानी की उपलब्धता रहती है। आसपास खेती प्रमुख व्यवसाय होने के कारण परिंदों को भोजन उपलब्ध हो जाता है। पानी के बीच टापू उन्हें सुरक्षा प्रदान करता है। लेकिन इस वर्ष जवाई में पानी अधिक होने के कारण वर्तमान में पक्षियों की आवक कम हुई है। अगले दिनों पानी कम होने पर पक्षियों का अधिक संख्या में आना तय है।

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